नई दिल्ली | 11 जून 2025 | संवाददाता – द वक़्ता
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के तलवार से केक काटने की तस्वीरें सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। इस पूरे घटनाक्रम पर केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने तीखा तंज कसते हुए कहा, “आज तलवार, कल एके-47 से केक उड़ाया जाएगा क्या?”
🎂 लालू यादव के जन्मदिन की तस्वीर बनी सियासी हथियार
अपने 77वें जन्मदिन के मौके पर लालू यादव ने एक चमकती हुई तलवार से केक काटा, जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। इस दृश्य ने राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी कि क्या यह केवल एक प्रतीकात्मक उत्सव था या इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश छिपा है।
🗣 मांझी का तीखा प्रहार: “लाठी से शुरू, अब तलवार – आगे क्या?”
आईएएनएस से विशेष बातचीत में जीतन राम मांझी ने लालू यादव के इस कृत्य को "राजनीतिक प्रतीकवाद की चरम सीमा" बताया। उन्होंने कहा:
“जब वो सत्ता में थे, तब ‘लाठी में तेल पिलाओ’ कहकर समाज को गुमराह किया। अब तलवार से केक काटकर क्या दिखाना चाहते हैं? क्या ये जनता को डराने का प्रतीक है?”
उन्होंने आगे कटाक्ष करते हुए कहा:
“अगर कल उन्हें सत्ता मिल गई, तो क्या वे AK-47 से केक काटेंगे? ये गलत परंपरा है। नेता समाज को प्रेरणा देते हैं, भय नहीं।”
📲 सोशल मीडिया पर तीखी पोस्ट के साथ जन्मदिन की बधाई
मांझी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लालू यादव की तलवार से केक काटते हुए तस्वीर शेयर करते हुए लिखा:
“लाठी में तेल पिलवाकर समाज को बांटने वालों के व्यवहार में बदलाव आ ही नहीं सकता। आज जब सरकार में नहीं हैं तो साहेब तलवार से केक काट रहे हैं। गलती से बेटवा कुछ बन गया तो AK-47 से केक उड़ाया जाएगा। है ना लालू जी? खैर, जन्मदिन की बधाई।”
🏛 लालू यादव की चुप्पी और RJD की प्रतिक्रिया का इंतजार
अब तक लालू यादव ने इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, RJD से जुड़े सूत्रों ने इसे "सिर्फ एक प्रतीकात्मक उत्सव" बताते हुए मांझी के बयान को "जरूरत से ज्यादा तूल देना" कहा है।
📌 बिहार की कानून-व्यवस्था पर भी बोले मांझी
बिहार की सुरक्षा व्यवस्था पर विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए मांझी ने कहा:
“14 करोड़ की आबादी वाले राज्य में घटनाएं होती हैं, लेकिन आज त्वरित कार्रवाई होती है। अपराधियों को सजा मिल रही है। लालू राज में तो अपराधियों से समझौते कराए जाते थे।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि:
“ईश्वर से प्रार्थना है कि वैसी जंगलराज की वापसी बिहार में फिर कभी न हो।”
🔎 विश्लेषण | राजनीतिक प्रतीकों की ताकत
भारतीय राजनीति में प्रतीकों का हमेशा से एक विशेष स्थान रहा है – चाहे वह गांधी की लाठी हो या भगत सिंह की पगड़ी। लेकिन जब ये प्रतीक हिंसा या डर का संकेत देने लगते हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
लालू यादव के तलवार से केक काटने को राजनीतिक आक्रामकता या शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है, जबकि मांझी जैसे नेता इसे समाज को गलत संदेश देने की कोशिश बता रहे हैं।
Login
कमेंट्स