नई दिल्ली, 06 जुलाई।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर हलचल तेज हो गई है। मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल जून 2024 में समाप्त हो चुका है और वे इस समय कार्यकाल विस्तार पर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही वे मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में केंद्रीय मंत्री की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। ऐसे में संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाने के लिए पार्टी अब नए अध्यक्ष की नियुक्ति की ओर अग्रसर है।
ये नाम हैं चर्चा में
भाजपा नेतृत्व की नजर छह वरिष्ठ नेताओं पर है, जो इस पद के लिए संभावित उम्मीदवार माने जा रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और भूपेंद्र यादव, संगठन में कार्यरत सुनील बंसल और विनोद तावड़े के नाम शामिल हैं।
इन नेताओं के चयन में पार्टी नेतृत्व संगठनात्मक अनुभव, कार्यक्षमता, जमीनी पकड़ और क्षेत्रीय व जातीय समीकरणों को ध्यान में रख रहा है। उदाहरण के तौर पर शिवराज सिंह चौहान को मध्य भारत में उनकी लोकप्रियता और अनुभव के लिए जाना जाता है, वहीं खट्टर का प्रशासनिक अनुभव और सुनील बंसल का सांगठनिक कौशल उन्हें मजबूत दावेदार बनाता है।
लेकिन इन नामों पर है संघ और मोदी की सहमति
लेकिन नामों की इस आपाधापी में कुछ गंभीर नामों की वैसी चर्चा नहीं हो प् रही है, जैसी होनी चाहिए। मसलन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जम्मू कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा को ही लिए जाये तो उनके नाम में आम सहमति और वज़न ज्यादा है . दरअसल, अभी जितने नाम चल रहे हैं उनमे सुनील बंसल और खट्टर को छोड़कर बाकि किसी भी नाम पर मोदी और संघ की सहमति नहीं बन प् रही है.
जबकि दो पार्टी के अध्यक्ष रह चुके राजनाथ को समन्वय का चेहरा माना जाता है। वह मोदी को भी उतने ही स्वीकार्य हैं जितने संघ और भाजपा के दयसरे नेताओं को। वहीँ उत्तरप्रदेश का मुख्यमंत्री बनने से चूके मनोज सिन्हा के नाम पर भी संघ और मोदी में लगभग मतैक्य है . लेकिन चतुर राजनाथ इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं। दरअसल, सूत्रों की मानें तो राजनाथ ने मंत्री पद छोड़ पार्टी सँभालने के बदले अपने बेटे पंकज सिंह को उत्तरप्रदेश में मंत्री बनाने की शर्त रख दी है।
महिला अध्यक्ष क्यों नहीं ?
एक लॉबी ऐसी भी है जो इस प्रक्रिया में व्याप्त अनिश्चय की वजह से स्मृति ईरानी , तमिलनाडु की विधायक वनति श्रीनिवासन ,आंध्र भाजपा की अध्यक्ष डी पुरंदेश्वरी, हरियाणा की भाजपा नेत्री डॉ सुधा यादव समेत कई नामों को उछाल रहे हैं.
बहरहाल, बताया जा रहा है कि भाजपा जल्द ही केंद्रीय चुनाव समिति का गठन कर सकती है जो अध्यक्ष पद की नियुक्ति प्रक्रिया को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाएगी। यदि सभी पक्षों में सहमति नहीं बनी, तो चुनाव की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम को देखते हुए स्पष्ट है कि भाजपा नेतृत्व परिवर्तन को केवल औपचारिकता न मानकर एक रणनीतिक निर्णय के रूप में ले रही है। इसका उद्देश्य पार्टी को भविष्य की चुनावी चुनौतियों के लिए तैयार करना और संगठन को और अधिक सशक्त बनाना है।
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