वक्ता की पाती
अजयभान सिंह
आदरणीय प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री जी,
'द वक्ता' की तरफ से जय जोहार, जय सियाराम। 'अत्र कुशलम तत्र अस्तु'। आगे समाचार यह है कि दिनांक 18 सितंबर 2025 को प्रतिपक्षी दल के युवराज रवैल नंदी द्वारा किए गए हाइड्रोजन-बम विस्फोट के बाद हमारे इलाके में लोगों का जीवन दुश्वार हो गया है। घरों की खिड़कियों के कांच टूट-टूटकर बिखर गए हैं। प्लास्टर उखड़ गया है।
सड़कों में ऐसी दरारें पड़ी हुई हैं जैसी वैरी के हृदय में होती है। फर्नीचर हिलाने डुलाने पर ही धड़ाम से लुढ़क लेते हैं। इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की हड़ताल हो गई है। कहते हैं इस तरह के मिथ्या विस्फोट उनकी सेहत और विश्वसनीयता के लिए घातक हैं। जन जीवन ठप्प हो चुका है।
विस्फोट से आसमान में फैली कालिख से सफेद कपड़े, काली भैंस के जैसे श्याम-वर्णी हो गए हैं। चादरों, दरियों और जींस जैसे मोटे, बेशर्म, स्थूलकाय कपड़ों ने साफ होने और धुलने से ही इंकार करना शुरू कर दिया है। गृहिणियों की जान पर बन आई है। ऐसा भयानक रेडिएशन हुआ है कि घरों में प्लास्टर की हिफाज़त में ढंकी-मुंदीं ईंटें बाहर निकलने को कसमसा रही हैं, रुदन कर रही हैं, चिल्ला रही हैं।
घरों के बाहर पार्कों में, कबाड़ में, गैरेज में और झाड़ियों में रेंगने वाले वाले गिरगिट, छिपकलियां, सांप, बिच्छू, कनखजूरे भय के मारे हमारे घरों में घुस गए हैं। नतीज़ा, चूहों और कॉकरोचों पर एक तरह की अनिमंत्रित राष्ट्रीय आपदा सी आ गयी है।

हुजूर कहाँ तक कहें, गली के सारे कुत्तों की पूंछ सीधी हो गई है। बुजुर्ग कह गए हैं कि सीधी पूंछ वाला कुत्ता अवश्य ही पागल होता है। इस कारण लोगों ने घरों से निकलना बंद कर दिया है। क्योंकि कुत्तों को मारने का विकल्प तो सुप्रीम कोर्ट जनता से पहले ही छीन चुका है।उधर आपदाओं को सबसे पहले पहचानने वाली बिल्लियों का तो डीएनए ही बदल गया है। अब वो म्याऊं-म्याऊं की जगह भौं-भौं करने लगी हैं। आप ही बताइए, आपको वोट देने वालों को ये सिला मिलना कहाँ तक उचित है?
प्रभु, जैसा कि आपको भली-भांति विदित ही है कि आपको चाहने वाली अधिसंख्य जनता गरीब-गुरबों में शुमार की जाती है। ऐसे में यह कहने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए कि हाइड्रोजन विस्फोट के बाद आपकी इस निरीह जनता को कितने कष्ट झेलने पड़ रहे हैं। ऊपर जो लिखा है वह तो एक बानगी भर है। हमारी तकलीफों की तो कोई इंतिहा ही नहीं दीख रही।
उधर, आसमान में कालिख और गंदे-गंदे देश विरोधी नारों की गूंज से हजारों देश-प्रेमियों के कानों के पर्दे फट गए हैं। कुछ लोगों की तो असमय बुद्धि सठिया गई है। विज्ञान-जीवियों का अनुमान है कि हाइड्रोजन-बम के प्रभाव से हमारी कई पुश्तें मानसिक रूप से कुंठित पैदा हो सकती हैं।
अन्याय की इंतिहा देखिए कि युवराज नंदी की पार्टी के लोगों पर इस विकिरण का कोई असर नहीं हो रहा है। वो हमारे घरों के सामने, हमारे हालात पर अट्टहास कर रहे हैं। विज्ञानियों ने यह भी कहा है कि युवराज के अंध-समर्थकों और चरण-चुंबकों पर इस विस्फोट का कोई असर नहीं होगा क्योंकि उन्हें बहुत पहले ही माओ-सोरोस-रसायन पिला-पिलाकर संवेदनाशून्य किया जा चुका है।

इधर, सड़कों पर, घरों के फर्श पर, मैदानों में, गलियों और चौबारों में चौतरफा एक काला-काला, भयानक दुर्गंधयुक्त, चिपचिपा 'डीपस्टेट-सोरोस-रस' फैल गया हैं। इस गंदे, मलेच्छ-रसायन की वजह से हमारे पैरों से शुरू होकर पूरे शरीर में भारी दाह हो रहा है। इसी रस से जब-तब, अजीब-अजीब सी डरावनी धमकी भरी आवाज़ें आती हैं। कभी ये रस चिल्लाता है कि बांग्लादेश जैसा करा दूंगा, नेपाल जैसा करा दूंगा, श्रीलंका दोहरा दूंगा, तो कभी कहता है सिविल वार होगा, बारूद के ढेर पर बैठा है भारत, पूरे देश में पेट्रोल छिड़का जा चुका है, आग लगा दूंगा, तीली दिखा दूंगा। ऐसा जान पड़ता है युवराज इस रस में कुछ ज्यादा ही अनुरक्त हैं और शायद इसी की ट्रेनिंग लेने के लिए हाल ही में एक आइलैंड के दौरे पर गए थे।
हुजूर, ऐसे दहशत भरे नारे और धमकियां सुन-सुन के छोटे-छोटे बच्चे सहम से गए हैं। बच्चे अब मोमोज, बर्गर, पिज़्ज़ा और चॉकलेट खाना तो दूर उनकी तरफ देख भी नहीं रहे हैं। मोबाइल पर गेम भी नहीं खेल रहे। डर के मारे लोगों की नींद उड़ गई है। रहना, खाना, जीना सब दुश्वार। किसी का जी चैन में नहीं है। घर-घर में बस एक ही चर्चा हो रही है कि इस हाइड्रोजन बम से कैसे पार पाएं। कुछ लोगों को विभाजन का दौर याद आ गया है जब सत्ता के लिए बौराए किसी जिन्ना ने इसी तरह भयानक गदर मचाई थी।
सरकार-ए-आला, चिंता के बादल कुछ छंट पाते, उसके पहले ही युवराज ने यह घोषणा और कर दी कि अभी जो बम फोड़ा गया है वो हाइड्रोजन बम नहीं है। हाइड्रोजन बम फोड़ना तो अभी बाकी है। इसके बाद से जनता के प्राण टेंटुए में आ गए हैं हुजूर। अब, इतनी भयानक धमकी के बाद आप सहज ही अनुमान लगा सकते हैं कि आम आदमी के चित्त पर क्या इसका क्या असर हुआ होगा? अहर्निश एक ही धुकधुकी लगी रहती है, अब क्या होगा।
वैसे बुरा न मानें तो एक निवेदन करूं। छोटे मुंह बड़ी बात। लेकिन आपके संबल से कह देता हूं। मैंने सुना है कि नावाक़िफ़ शहजादे को आपकी जगह पर पीएम बनना है। जिद ठान ली है। यह भी सुना है कि उनके राग-दरबारियों ने उन्हें यह उल्टी पट्टी पढ़ा-सिखा दी है पीएम की कुर्सी पर उनके खानदान का परमानेंट पट्टा है। हमारी विनती मानकर, उन्हें बच्चा समझकर, उनकी ख्वाहिशों पर एक बार सुहानुभूति पूर्वक विचार कर लीजिए। हमारे जैसे कई कमज़र्फ लोगों ने एक युक्ति पर विचार किया है। काफी विचार विमर्श के बाद आपके समक्ष निवेदन कर रहा हूँ।

यह तो सभी जानते हैं कि शहजादे में लियाकत नाम की कोई चीज तो है नहीं, किन्तु फिर भी उनको पीएम बनना है, तो बना क्यों नहीं देते आप? दअरसल, रविवार को पूरे देश में सरकारी छुट्टी हुआ करती है। सारे देश में शनिवार देर रात तक मौज मस्ती और धमाल पार्टीज चलती रहती हैं। सुबह सब लोग आराम से उठते हैं, दिन में बाजार जाते हैं, मॉल जाते हैं, पिकनिक जाते हैं। या फिर चादर तान के सोते हैं। शाम को मोमोज, पकौड़े खाते हैं, या पौवा चढ़ाते हैं। यानि कुछ काम-धाम नहीं होता।
और फिर, युवराज तो कामकाज में वैसे भी खासे फिसड्डी माने जाते हैं, इसलिए उनपर काम का बोझ डाले बिना, उन्हें रविवार सुबह 3 बजे से सुबह 5 बजे तक के लिए देश का प्रधानमंत्री बना दीजिए। हफ्ते भर पूर्व प्रधानमंत्री कहलाते रहेंगे तो उनके कलेजे को ठंडक मिलती रहेगी। उनका बाल-हठ भी पूरा हो जाएगा और देश की नीतियों और कार्यक्रमों में कोई खलल भी नहीं पड़ेगा।
यूँ उनके इकोसिस्टम में तो वैसे भी सब लोग रात में ढाई-तीन बजे सोते हैं, युवराज के प्रधानमंत्रित्व काल में किसी के उठने का तो सवाल ही नहीं। इस तरह, आम के आम गुठलियों के दाम हो जायेंगे। इसका एक फायदा यह भी होगा कि हम जैसे गरीब-गुरबा जो उनके दल से इत्तेफाक नहीं रखते उन्हें हाइड्रोजन-बम के भयानक दुष्प्रभावों से मुक्ति मिल जाएगी। और फिर आपको भी तो एक दो घंटे की विश्रांति मिल ही जाएगी।

इसका एक बहुत बड़ा फायदा मुझे और दिख रहा है। अगर युवराज किसी तरह संतुष्ट हो गए तो अपने देश की निरीह जनता पर ही हाइड्रोजन, एटम बम फेंकना बंद कर देंगे। इससे देश तो बचेगा ही, बम भी बच जायेंगे। बाद में इन्ही बमों को हम ईरान, सऊदी अरब जैसे तमाम अरब देशो को मोटी रकम लेकर बेच देंगे। मान्यवर, हमारे खजाने और विदेशी मुद्रा भंडार की तो लाटरी निकल पड़ेगी।
प्रिय महोदय, जाते जाते एक और निवेदन करना चाहता हूं। युवराज नंदी के विस्फोट से आम जन जीवन में जो उथल-पुथल हुई है, व्यवधान आया है, एक गहन कालिमा आई है, अविश्वास और घृणा फैली है। उसके लिए कृपा करके एक राहत-पैकेज की घोषणा की जाए। इस पैकेज में विस्फोट की कालिख को साफ करने के लिए सभी घरों का रंग-रोगन सरकारी खर्चे पर किया जाए। वैसे भी दिवाली आ रही है, आपकी जय-जय हो जाएगी।
इसके अलावा सभी प्रभावितों को चित्त-शुद्धि एवं मुख-शुद्धि हेतु चटनी-युक्त समोसा अथवा कचौरी अथवा मूंग बड़ा खाने के लिए प्रति व्यक्ति 21 रुपए आवंटित किए जाएं। यवन कुलोत्पन्न 'सोरोस-रस' से मुक्ति के लिए देश के सभी दुर्गा पंडालों में दुर्गापाठ कराए जाएं। मुझे लगता है इतने में तो काम बन ही जाएगा। आशातीत सफलता की गारंटी है।
पत्र समाप्ति से पहले एक आखिरी निवेदन। इस ज्वलंत और धधकती समस्या से रूबरू कराने वाले को पुरस्कृत करने के बारे में तो आप अवश्य ही सोच रहे होंगे। उदारमना जो ठहरे। देश की सुरक्षा का मामला है, इसलिए मुझे ज्यादा नहीं चाहिए। बस 1111 करोड़ रुपए का इनाम आप इस गरीब देशभक्त के नाम पर जारी कर सकते हैं। कसम से, भयंकर सदुपयोग करूंगा।
जम्मो छत्तीसगढ़िया मन के तरफ ले जय जोहार, जय छत्तीसगढ़, जय भारत।
सदैव आपका ही
रायपुर में रहन वाला एक निरीह देशभक्त
'द वक्ता'
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