नई दिल्ली, 12 जुलाई। भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आज कहा, "कोचिंग सेंटर अब 'पोचिंग सेंटर' बन गए हैं। वे प्रतिभाओं के लिए ब्लैक होल बन गए हैं। कोचिंग सेंटर तेजी से फैल रहे हैं। यह हमारे युवाओं के लिए खतरनाक है, जो हमारे भविष्य हैं। हमें इस चिंता जनक बुराई से निपटना ही होगा। हम अपनी शिक्षा व्यवस्था को इस तरह कलंकित और दूषित नहीं होने दे सकते।
धनखड़ ने आगे कहा, “अब राष्ट्रों को सेनाओं द्वारा नहीं, बल्कि एल्गोरिद्म के ज़रिए नियंत्रण में लाया जाएगा, क्योंकि सेनाओं की जगह अब एल्गोरिद्म ने ले ली है। संप्रभुता अब आक्रमणों से नहीं, बल्कि विदेशी डिजिटल ढांचे पर निर्भरता के कारण खोएगी।
राजस्थान के कोटा स्थित भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) के चौथे दीक्षांत समारोह को आज मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “आज हम गुरुकुल की बात कैसे कर सकते हैं - भारतीय संविधान में 22 दृश्य चित्रणों में एक गुरुकुल की भी छवि है। हम हमेशा से ज्ञान के दान में विश्वास करते रहे हैं। कोचिंग सेंटरों को अपने बुनियादी ढांचे का उपयोग कौशल केंद्रों में बदलने के लिए करना चाहिए। मैं सिविल सोसाइटी और मेरे सामने और बाहर मौजूद जनप्रतिनिधियों से आग्रह करता हूँ कि वे इस बीमारी की गंभीरता को समझें। उन्हें शिक्षा में विवेकशीलता बहाल करने के लिए एकजुट होना होगा। हमें कौशल के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता है,"।
धनखड़ ने शिक्षा को असेंबली लाइन की तरह मानने के विचार का कड़ा विरोध करते हुए कहा, "हमें इस असेंबली लाइन संस्कृति को समाप्त करना होगा, क्योंकि यह संस्कृति हमारी शिक्षा के लिए बहुत खतरनाक है। कोचिंग सेंटर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रवाह के विरुद्ध हैं। यह विकास और प्रगति में अनावश्यक रुकावटें और बाधाएं पैदा करता है।
उपराष्ट्रपति ने तकनीकी नेतृत्व में निहित देशभक्ति के एक नए दृष्टिकोण का आह्वान करते हुए कहा, "हम एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं, नए राष्ट्रवाद के युग में। तकनीकी नेतृत्व देशभक्ति का नया आयाम है। हमें तकनीकी नेतृत्व में विश्व में अग्रणी बनना होगा।"
उन्होंने रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता पर चिंता जताते हुए कहा, "यदि हम बाहर से प्रौद्योगिकी आधारित उपकरण प्राप्त करते हैं, विशेष रूप से रक्षा जैसे क्षेत्रों में, तो उस देश के पास हमें रोकने की शक्ति है।"
Coaching centres have turned out to be poaching centres. They have become black holes for talent in regimented silos.
— Vice-President of India (@VPIndia) July 12, 2025
Coaching centres are mushrooming. This is menacing for our youth who are our future.
We must address this malice that is worrisomely concerning. We cannot… pic.twitter.com/QPZXoEUuT3
उन्होंने बताया कि डिजिटल युग में वैश्विक शक्ति की गतिशीलता कैसे बदल रही है, और कहा, "21वीं सदी का युद्धक्षेत्र अब ज़मीन या समुद्र नहीं है। पारंपरिक युद्ध के दिन अब बीत चुके हैं। हमारी क्षमता, हमारी शक्ति का निर्धारण कोड, क्लाउड और साइबर द्वारा किया जाना चाहिए।”
धनखड़ ने इस बात पर जोर दिया कि अंकों के प्रति जुनून सीखने की भावना को किस प्रकार नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा, “उत्तम ग्रेड और मानकीकृत अंकों के प्रति जुनून ने जिज्ञासा को नुकसान पहुंचाया है, जो मानव बुद्धि का एक अभिन्न पहलू है। सीटें सीमित हैं, लेकिन कोचिंग सेंटर पूरे देश में फैले हुए हैं। वे सालों तक छात्रों के दिमाग को तैयार करते हैं और फिर उन्हें रोबोट बना देते हैं। उनकी सोच पूरी तरह से अवरुद्ध हो गई है। इससे कई मनोवैज्ञानिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं।”
उपराष्ट्रपति ने डिजिटल दुनिया की ओर ध्यान दिलाते हुए इस बात पर जोर दिया कि, “जो स्मार्ट ऐप ग्रामीण भारत में काम नहीं करता, वह पर्याप्त स्मार्ट नहीं है। एक ऐसा एआई मॉडल जो क्षेत्रीय भाषाओं को नहीं समझता, अधूरा है। एक ऐसा डिजिटल टूल जो विकलांगों को बाहर रखता है, अन्यायपूर्ण है।”
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