केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज महाराष्ट्र के पुणे में श्रीमंत बाजीराव पेशवा 'प्रथम' की प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार और केन्द्रीय सहकारिता राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल भी उपस्थित थे।
शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकास भी और विरासत भी का सूत्र दिया है जिसके तहत हमारी हज़ारों साल पुरानी संस्कृति में प्रेरणा के स्रोत हज़ारों व्यक्तियों और इतिहास को हमारे युवाओं और योद्धाओं के लिए उपलब्ध कराना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि पुणे की भूमि स्वराज के संस्कार का उद्गम स्थान है।
17वीं शताब्दी में यहीं से स्वराज की आवाज़ उठी थी और अंग्रेज़ों के सामने जब स्वराज के लिए जनता के लड़ने का समय आया तो सबसे पहले आवाज़ लोकमान्य बालगंगाधर तिलक ने उठाई। उन्होंने कहा कि वीर सावरकर ने महाराष्ट्र की भूमि से ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया कि एक व्यक्ति अपने जीवन में अपने देश के लिए कितना कुछ कर सकता है।
शाह ने कहा कि पेशवा बाजीराव की देशभर में कई जगह प्रतिमाएँ स्थापित की गई हैं लेकिन उनका स्मारक बनाने की सबसे उचित जगह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) पुणे ही है। उन्होंने कहा कि भविष्य के भारत की तीनों सेनाओं के सूत्रधार यहां से प्रशिक्षित होकर निकलते हैं।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि युद्ध की कला के कुछ नियम कभी कालबाह्य नहीं होते और वे अमर होते हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध में व्यूह रचना, तेज़ी, समर्पण, देशभक्ति और बलिदान का भाव ही सेनाओं को विजय दिलाता है। श्री शाह ने कहा कि बाजीराव पेशवा जी ने 20 साल में 41 युद्ध लड़े और सभी में विजय प्राप्त की। पराजय को पूरे जीवन अपने नज़दीक न आने देने वाले बाजीराव पेशवा जी जैसे वीर सेनानी की प्रतिमा लगाने का सबसे उचित स्थान NDA अकादमी ही हो सकता है।

अमित शाह ने कहा कि बाजीराव पेशवा जी ने अपने कौशल, रणनीति और वीर साथियों की मदद से कई हारे हुए युद्धों को जीत में परिवर्तित किया। उन्होंने कहा कि गुलामी की निशानियों को हर जगह ध्वस्त कर वहां स्वतंत्रता का दीप प्रज्जवलित करने का काम बाजीराव पेशवा जी ने किया। श्री शाह ने कहा कि पूरे 20 साल के कालखंड में बाजीराव पेशवा जी को घोड़े से नीचे उतरते हुए किसी ने नहीं देखा।
गृह मंत्री ने कहा कि कुछ लोग बाजीराव पेशवा जी को ईश्वरदत्त सेनापति, अजिंक्य योद्धा और शिवशिष्योत्तम बाजीराव पेशवा भी कहते हैं। बाजीराव पेशवा ने सभी युद्ध अपने लिए नहीं बल्कि देश और स्वराज के लिए लड़े थे। छत्रपति शिवाजी महाराज जी ने अपने छोटे से जीवनकाल में न सिर्फ हिंदवी स्वराज की स्थापना करने का काम किया बल्कि युवाओं के मन में स्वराज के संस्कार भी भरे।
उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज के बाद कई योद्धाओं ने उनकी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए स्वराज की ज्योति को बुझने नहीं दिया। श्री शाह ने कहा कि अगर शिवाजी महाराज द्वारा शुरू की गई स्वतंत्रता की लड़ाई को पेशवाओं ने 100 साल तक न चलाया होता तो आज भारत का मूल स्वरूप ही न बचा होता।
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