ट्रम्प और मस्क के झगड़े से दुनिया में बनेंगे नये सत्ता समीकरण

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ट्रम्प और मस्क के झगड़े से दुनिया में बनेंगे नये सत्ता समीकरण

​​​​रघु ठाकुर

 

अमेरिका के पिछले राष्ट्रपति पद के चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प के सबसे नजदीकी प्रचारक एलन मस्क माने गये। एलन मस्क अमेरिका की उस स्टारलिंक कम्पनी के मालिक हैं जो अंतरिक्ष-तकनीक मामले में सर्वाधिक सशक्त है। उनकी कंपनी की दक्षता इससे ही जानी जा सकती है कि आठ माह तक अंतरिक्ष में अटकी रहीं सुनीता विलियम्स और उनके सहयोगियों की धरती पर वापसी एलन मस्क के प्रयासों से ही सम्भव हुई। अमेरिकी सरकार और नासा के लिए भी उन्हें पृथ्वी पर लाना सम्भव नहीं हो पा रहा था। अमेरिकी समाज में इसको लेकर गंभीर चिंता थी। अंतरिक्ष की खोजी दुनिया में भी यह चिंता का विषय था। 

 

जो शोध-सूचनाएं-अनुभव और ज्ञान सुनीता विलियम्स और उनके सहकर्मियों ने संग्रहित किए होंगे, जो विज्ञान व अंतरिक्ष के भविष्य के लिए बहुत उपयोगी होंगे, सुनीता विलियम्स की अगर वापसी न होती तो वह भी छिपे रह जाते। ट्रंप ने अपने चुनाव अभियान में बाइडन  सरकार पर यह आरोप लगाया था कि वह विलियम्स को वापस नहीं लाना चाहते इसलिए हर बार तारीख बढ़ जाती है। डोनाल्ड ट्रम्प ने सुनीता विलियम्स और उनके साथियों को वापस लाने वादा करते हुए यह महत्वपूर्ण कार्य उन्होंने एलन मस्क को सौंपा था। इस कार्य को एलन मस्क ने पूरा कर दिखाया। 

 

अमेरिकी प्रशासन तंत्र में जो लोग डोनाल्ड ट्रम्प से बहुत डरे हुए थे और जिन्हें ट्रंप अपनी सत्ता का बाधक मानते थे, उन्हें दुरुस्त करने का काम भी डोनाल्ड ट्रम्प ने एलन मस्क को सौंपा था और संबंधित विभाग का प्रभारी बनाया था। उन्होंने अपने अल्पकाल में वह काम भी लगभग पूरा किया। परंतु पिछले कुछ दिनों से ट्रंप और मस्क की जुगल जोड़ी में बिखराव आया है। मस्क ने ट्रंप के द्वारा दी हुई जवाबदारी को छोड़ दिया है। उनके रिश्ते भी लगभग टूट चुके हैं। यहां तक की उन्होंने बयान दिया है कि अगर मैं समर्थन न करता तो ट्रंप हार जाते। 

 

ट्रंप ने उत्तर दिया कि उनके समर्थन न करने के बावजूद वे चुनाव जीतते। ट्रंप और मस्क के बीच  मतभेद गहराता जा रहा है। यहां तक की मस्क ने ऐलान कर दिया है कि वह अलग पार्टी बना रहे हैं। उस पर काम करना शुरू कर दिया है। ट्रंप और मस्क के मतभेद के दो प्रमुख कारण बताए जाते हैं पहला यह कि मस्क ट्रंप के द्वारा लगातार टैरिफ बढ़ाये जाने के खिलाफ थे। 

 

वे चाहते थे कि ट्रंप यह न करें। उनका मानना है कि टैरिफ की वृद्धि जिसे श्टैरिफ वार्य कहा गया, से अमेरिका की अर्थव्यवस्था को भारी क्षति पहुंचेगी। इस बारे में अलग-अलग राय हैं। कुछ लोग अभी भी यह मानते हैं कि इस टैरिफ वार से अमेरिका को कोई नुकसान नहीं होगा। यह भी बताया गया है की टैरिफ वार के बावजूद अमेरिका को 84 हजार करोड़ रुपए का फायदा हुआ है। यह फायदा आयात पर टैरिफ से हुआ है।

 

जो भी हो परंतु यह मस्क और ट्रंप का विवाद कई नए परिणाम ला सकता है। पिछले कई सौ वर्ष से अमेरिका में मुख्यतरू दो ही पार्टियों के बीच मुकाबला रहा है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी। मतदाता वर्ग में भी एक प्रकार का ध्रुवीकरण हुआ है। अब मस्क की तीसरी पार्टी बनने के बाद अमेरिका के मतदाताओं का रुझान क्या होगा अमेरिका की दो दलीय राजनीति तीन दलीय राजनीति में बंटेगी या फिर मतदाता इस तीसरी पार्टी को स्वीकार करेगा, कहना कठिन है। 

 

हालांकि तीनों पार्टियां अमेरिकी पूंजीवाद की पोषक पार्टियां हैं। एलन मस्क के अलगाव का एक असर अमेरिका के अंतरिक्ष कार्यक्रमों और विश्व तकनीक जगत पर पड़ेगा क्योंकि एक दूसरे को कमजोर करने के लिए ट्रंप और मस्क घात प्रतिघात का खेल खेलेंगे। एक सच्चाई यह है कि यह दोनों ही वैश्विक पूंजीवाद के प्रमुख प्रवक्ता हैं और मूल नीतियों में कोई अंतर नहीं है। ट्रंप को झुकाने के लिए एलन मस्क ने एक तरफ 830 करोड़ की चुनावी फंडिंग रोकने का संकेत दिया है। यह भी कि वे अब ट्रंप विरोधी कैंपेन को फंडिंग करेंगे। 

 

मस्क ने 5 जून को एक्स पर अमेरिकी मतदाताओं से पूछा था कि क्या अमेरिका में नया राजनीतिक दल बनना चाहिए? 24 घंटे में 47 लाख लोगों ने वोट दिया। 80 फीसदी लोगों ने नए दल का समर्थन किया। यह भी कहा कि ट्रंप पर महाभियोग चलना चाहिए। मस्क ने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन ने जैपनी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों को इसलिए रोका है क्योंकि उनमें उनका नाम है। मस्क ने यह धमकी भी दी है कि वह स्पेस एक्स  से ड्रैगन यान बंद कर देंगे जो सूचनाएं पहुंचाता है। ट्रम्प के समर्थक स्टीव ने कहा कि राष्ट्रपति को आधी रात को स्पेस एक्स को जप्त कर लेना चाहिए। 

 

ट्रंप ने भी मस्क की कंपनियों को सरकारी एजेंसियों से मिले पच्चीस हजार करोड़ के ठेके रद्द करने की धमकी दी है। ट्रंप मस्क की टॉप सीक्रेट सुरक्षा का क्लियरेंस रद्द कर सकते हैं और राष्ट्रपति के अधिकारों का प्रयोग करते हुए मस्क के खिलाफ कई प्रकार की जांच बिठा सकते हैं। हालांकि ऐसी राजनीतिक कार्यवाहियों से एलन मस्क को फायदा भी हो सकता है और विशेष कर जो नया राजनीतिक दल बनाने की तैयारी में है उसके लिए उन्हें लाभ मिल सकता है। ट्रंप और मस्क के इस अलगाव से अमेरिकी राजनीति में जो नए प्रकार का प्रयोग शुरू हुआ है वह आम अमेरिकी के स्वभाव के विपरीत है। 

 

ऐसा लगता है कि मानसिक रूप से दो तानाशाहों के बीच का यह युद्ध अमेरिकी व्यवस्था को वैश्विक स्तर पर गंभीर क्षति पहुंच जाएगा। अमेरिका की विश्व शक्ति, आर्थिक शक्ति और सामरिक शक्ति के एकाधिकार को अंदर से ही क्षति पहुंचाने वाला हो सकता है। ट्रंप के टैरिफ वार के अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव होंगे और अमेरिकी समाज उसे अमेरिका प्रथम के रूप में देखेगा या अमेरिका की अर्थव्यवस्था को नुकसानदायक मानेगा इस पर कोई विशेष अध्ययन नहीं हुआ है। 

 

अमेरिका के इस टैरिफ वार से और अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में भारत के प्रधानमंत्री की भूमिका को लेकर कई प्रकार के संदेह और प्रश्न अमेरिका के सत्ता प्रतिष्ठान में चिन्हित और चर्चित हो रहे हैं। ऐसा बताया गया है कि डोनाल्ड ट्रंप यह मानते हैं कि भारत के प्रधानमंत्री ने उनको हराने में अपनी भूमिका अदा की थी और चुनाव के कुछ ही दिन पहले जब जो बाइडेन रेस से हट चुके थे और अपने अमेरिकी प्रवास में उनके निजी घर पर जाकर श्री नरेंद्र मोदी का जो बाइडेन से मिलना भी उन्हें उचित नहीं लगा था।

 

 एलन मस्क के पिता श्री एरोल मस्क ने भी ऐसे कुछ संकेत दिए। एलन मस्क अपनी नई पार्टी के गठन और उसके जनाधार को बढ़ाने के लिए अमेरिका में बसे भारतीय समाज को अपने पक्ष में करने के लिए सक्रिय हुए हैं। इसमें उनका पूरा परिवार यानी उनके पिता भी सक्रिय हुए हैं। पिछले दिनों एलन मस्क ने भारत का दौरा किया था। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात हुई थी। 

 

जबकि कुछ माह पूर्व श्री मस्क ने श्री मोदी से मुलाकात के कार्यक्रम को टाल दिया था। इतना ही नहीं श्री मस्क ने भारत यात्रा के दौरान अयोध्या में राम मंदिर के भी दर्शन किए, इसके समाचार छपे हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति की तारीफ भी की। उनके पिता श्री एरोल मास्क ने 2 जून को पत्रकारों से चर्चा में ऑपरेशन सिंदूर का समर्थन करते हुए  कहा कि अगर पाकिस्तान समस्या पैदा कर रहा है तो कुछ करना होगा तथा आतंकवाद के साये में जी रहे कश्मीर की दुर्दशा को समाप्त करने की जरूरत बताई। उन्होंने पीएम मोदी को शानदार नेता बताया और कहा कि उनकी अगुवाई में भारत विश्वगुरु बनने जा रहा है। 

 

उन्होंने विश्व शांति के लिए सनातन धर्म का मार्ग अपनाने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान शिव की जय जयकार से संसार की समस्याओं से रक्षा होगी। उन्होंने भारत की बढ़ती हुई जीडीपी को भारत के विश्व शक्ति होना बताया था। एरोल मस्क और एलन मस्क के इन ताजा बयानों के बाद श्री नरेंद्र मोदी को और भाजपा तथा संघ को एक प्रोत्साहन मिला है। इसका प्रभाव अमेरिकी मतदाताओं पर भी पड़ेगा। हो सकता है कि मस्क की राजनीतिक लाइन या रणनीति यह हो कि अमेरिका के पचास प्रतिशत गोरे मतदाता तथा भारतीय मतदाता मिलकर उन्हें चुनाव में सफलता दिला सकते हैं।

 

 हालांकि यह कहना अभी एकदम दूर की कौड़ी होगी। तीन वर्षों में कितने करवट ट्रंप बदलेंगे, कितने मस्क बदलेंगे यह भी कहना संभव नहीं है। ट्रंप ने अमेरिका में बसे अवैध नागरिकों को लेकर उन्हें निकालने की, दंडित करने की, प्रोत्साहित करने की और सजा देने की नीति बनाई है। वे अमेरिका में अमेरिकियों को अमेरिकियों का रोजगार बढ़ाना चाहते हैं और इसके लिए उन्होंने अवैधानिक प्रवासियों पर रोक लगाने के लिए कदम उठाए हैं। 

 

उन्होंने हार्वर्ड जैसी शिक्षण संस्थाओं की आजाद गतिविधियों को नियंत्रित करना शुरू किया और 12 देशों से आने वाले छात्रों पर  रोक लगाने का आदेश पारित किया है। अपने निर्णय को क्रियान्वित करने के लिए उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय को अमेरिकी सरकार द्वारा दी जाने वाली 19 हजार करोड़ की टैक्स छूट को भी रोकने को कहा है। ऐसे मुल्कों के छात्रों को वीजा देने या निरस्त करने की भी घोषणा की है जो हार्वर्ड में पढ़ते हुए अमेरिकी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन आदि करते हैं। अमेरिकी राजनीति में यह एक बड़ा बदलाव है क्योंकि पिछले कई सदियों से अमेरिका खुले समाज व आंतरिक स्वतंत्रता का केंद्र रहा है। 

 

दुनिया के तमाम आतंकवादी केन्द्रों को खुराक अमेरिका से मिलती रही है। समय-समय पर अमेरिका ने दूसरे देशों को कमजोर करने के लिए इन केन्द्रों का प्रयोग किया है। अपने हितों के खिलाफ जाने वाली दुनिया के विभिन्न देशों की सरकारों को गिराने में भी इन संस्थाओं का अमेरिकी सिस्टम ने चतुर उपयोग किया है। अफगानिस्तान में कम्युनिस्ट सरकार को गिराकर तालिबानियों को सत्ता में लाने की भूमिका भी अमेरिकी व्यवस्था ने की थी। अब इस नई नीति के अमेरिकी सत्ता के केंद्र पर क्या प्रभाव होंगे यह भी अभी स्पष्ट नहीं है, परंतु ट्रंप और मस्क का यह सत्ता-संघर्ष अगर ऐसे ही चलता रहा तो यह एक भिन्न अमेरिका और भिन्न दुनिया को बनाने का मार्ग बनाएगा।

 

1000188937.jpg(लेखक देश के शीर्ष समाजवादी लेखक, चिंतक एवं नेता हैं) 

 

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